परामर्श एवं सहभागिता तंत्र
यह सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर परामर्श आयोजित किए गए कि स्थानीय लोगों को परियोजना के बारे में समुचित जानकारी प्राप्त हो तथा उनकी चिंताओं एवं प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जा सके। इससे परियोजना के प्रति लोगों की असुरक्षाओं एवं शंकाओं को कम करने में सहायता मिली। परियोजना ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रभावित आबादी एवं अन्य हितधारकों को परियोजना की जानकारी दी जाए, उनसे परामर्श किया जाए तथा उन्हें विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान किया जाए।
तैयारी चरण के दौरान प्रारंभ की गई यह परामर्श प्रक्रिया परियोजना के कार्यान्वयन एवं इसके परिणामों तथा प्रभावों की निगरानी के दौरान भी जारी रहेगी।
परियोजना की तैयारी के दौरान स्थापित परामर्श प्रक्रिया में प्रमुख व्यक्तियों के साथ विस्तृत साक्षात्कार, प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न होने वाले व्यक्तियों सहित फोकस समूह चर्चाएँ तथा सामाजिक प्रभाव आकलन के दौरान व्यक्तिगत परामर्श जैसी विभिन्न प्रकार की परामर्श प्रक्रियाएँ अपनाई गईं। इस प्रक्रिया के अंतर्गत महिलाओं को भी अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया। हितधारकों, परियोजना प्रभावित परिवारों (PAFs) आदि के साथ समय-समय पर परामर्श किया जाता रहा है। (परामर्श मैट्रिक्स)
सार्वजनिक सूचना केंद्र (PIC)
पारदर्शिता बनाए रखने तथा परियोजना प्रभावित परिवारों (PAFs) को सूचित रखने के उद्देश्य से वीपीएचईपी परिसर, सियासैंण में एक सार्वजनिक सूचना केंद्र (PIC) स्थापित किया गया है, जो वर्तमान में कार्यरत है। यह केंद्र नीतियों एवं अन्य संबंधित जानकारियाँ उपलब्ध कराता है तथा स्थानीय लोगों को परियोजना के संबंध में अपने विचार दर्ज कराने का अवसर प्रदान करता है। परियोजना के सभी प्रस्तावित घटकों का त्रि-आयामी (3-D) मॉडल भी सार्वजनिक प्रदर्शन हेतु यहाँ स्थापित किया गया है। परियोजना के निर्माण एवं संचालन अवधि के दौरान निरंतर जनसंपर्क बनाए रखने के लिए यह केंद्र कार्यरत रहेगा।
गैर-सरकारी संगठन (NGO)
पुनर्वास कार्ययोजना (RAP) के कार्यान्वयन हेतु स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (NGO) श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) को नियुक्त किया गया है। यह संगठन परियोजना के सामाजिक समूह के समन्वय से पुनर्वास कार्ययोजना (RAP) के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में कार्यरत है। टीएचडीसीआईएल, एनजीओ के सहयोग से प्रभावित समुदायों से परामर्श, प्रभावित परिवारों का सत्यापन तथा सूक्ष्म योजनाओं (Micro Plans) की तैयारी का कार्य करता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक परियोजना प्रभावित परिवार के सदस्य के लिए पहचान पत्र तैयार करना एवं वितरित करना, संयुक्त बैंक खाते खुलवाना, मुआवजा राशि के उत्पादक उपयोग हेतु परामर्श देना तथा मुआवजा सहायता के उपयोग की निगरानी करना भी एनजीओ की जिम्मेदारियों में शामिल है।
पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्रक्रिया में एनजीओ की भूमिका मानवीय एवं आर्थिक पुनर्वास से संबंधित है, जिसमें शिक्षा, प्रशिक्षण, जागरूकता सृजन तथा विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करना शामिल है।
निगरानी एवं मूल्यांकन तंत्र
अनैच्छिक पुनर्वास की प्रक्रिया में निगरानी एवं मूल्यांकन (M&E) अत्यंत महत्वपूर्ण गतिविधियाँ हैं। R&R नीति के अंतर्गत परियोजना एवं कॉर्पोरेट स्तर पर समय-समय पर R&R कार्यान्वयन की समीक्षा की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी गतिविधियाँ निर्धारित योजना के अनुसार संचालित हो रही हैं। यह प्रक्रिया परियोजना प्रबंधन को आवश्यक फीडबैक उपलब्ध कराती है जिससे कार्यक्रम समयबद्ध रूप से संचालित किए जा सकें। साथ ही, निगरानी प्रक्रिया ग्रामीणों को अपनी आवश्यकताओं एवं R&R कार्यान्वयन के प्रति अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त करने का अवसर भी प्रदान करती है।
R&R गतिविधियों की निगरानी वीपीएचईपी के सामाजिक एवं पर्यावरण विभाग द्वारा की जाती है, जो पुनर्वास कार्ययोजना (RAP) के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी है। परियोजना स्तर पर RAP के कार्यान्वयन की मासिक समीक्षा की जाती है। परियोजना अपनी प्रगति की जानकारी कॉर्पोरेट सामाजिक एवं पर्यावरण विभाग को उपलब्ध कराती है, जो R&R गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करते हुए आवश्यक सुझाव प्रदान करता है।
वर्ष 2011 में नई दिल्ली स्थित स्वतंत्र बाह्य एजेंसी एम/एस डीएचवी इंडिया प्रा. लि. को "वीपीएचईपी हेतु पुनर्वास कार्ययोजना (RAP) के कार्यान्वयन की निगरानी एवं मूल्यांकन संबंधी परामर्श सेवाएँ" प्रदान करने के लिए तृतीय पक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। यह संस्था निगरानी एवं मूल्यांकन के क्षेत्र में विशेषज्ञ है तथा R&R प्रक्रिया के लिए विशेष निगरानी प्रक्रियाएँ एवं पद्धतियाँ अपनाती है। परामर्शदाता समय-समय पर R&R कार्यों की निगरानी कर परियोजना एवं कॉर्पोरेट कार्यालयों को अपनी अनुशंसाएँ एवं सुझाव प्रस्तुत करते हैं। एम/एस डीएचवी समय-समय पर मध्यावधि मूल्यांकन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करती है, जिससे परियोजना को R&R गतिविधियों का अधिक प्रभावी एवं दक्षतापूर्वक क्रियान्वयन करने में सहायता मिलती है।
इसके अतिरिक्त, नवंबर 2009 में चमोली के जिला मजिस्ट्रेट के प्रतिनिधि की अध्यक्षता में 11 अन्य सदस्यों वाली एक निगरानी समिति का गठन किया गया, जो वीपीएचईपी द्वारा पुनर्वास कार्ययोजना (RAP) के कार्यान्वयन की प्रक्रिया की निगरानी करती है।