जल विद्युत परियोजनाओं में सामाजिक प्रभाव संबंधी मुद्दों के प्रति टीएचडीसी का दृष्टिकोण – टिहरी परियोजना : एक मानक की स्थापना
1000 मेगावाट टिहरी परियोजना, जिसमें एशिया का सबसे ऊँचा तथा विश्व का चौथा सबसे ऊँचा मिट्टी एवं शैल (Earth and Rockfill) बाँध निर्मित किया गया है, के कारण 42 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जलमग्न हुआ तथा लगभग 15,000 परिवारों का बड़े पैमाने पर विस्थापन हुआ। इस अनुभव ने टीएचडीसी को अपनी परियोजनाओं के सामाजिक प्रभावों को समझने तथा उनके प्रति संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने में अमूल्य सहायता प्रदान की।
टीएचडीसी अपनी परियोजनाओं के विकास से संबंधित भूमि अधिग्रहण, पुनर्स्थापन एवं पुनर्वास (R&R) के मामलों के प्रबंधन में उच्चतम मानकों का पालन करती है। कंपनी का प्रयास है कि इन गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित लोगों को पुनर्स्थापन के बाद कम से कम उनके पूर्व जीवन स्तर तक पहुँचने अथवा उससे बेहतर जीवन स्तर प्राप्त करने में सहायता प्रदान की जाए।
विष्णुगढ़ पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के बारे में
उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में स्थित 444 मेगावाट विष्णुगढ़ पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (VPHEP) का उद्देश्य अलकनंदा नदी के जल को जल वाहक प्रणाली के माध्यम से हाट गाँव के निकट स्थित भूमिगत विद्युतगृह तक पहुँचाकर 444 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन करना है। यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है तथा ऋषिकेश से लगभग 225 किमी दूर स्थित है।
जल विद्युत परियोजनाओं के सामाजिक पक्षों के प्रति टीएचडीसी की निरंतर प्रतिबद्धता – VPHEP
टीएचडीसी राष्ट्रीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2007 (NPRR-2007) के सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना विश्व बैंक की सहायता हेतु प्रस्तावित है, इसलिए यह बैंक के R&R दिशा-निर्देशों का भी पालन करेगी। VPHEP के लिए परियोजना-विशिष्ट R&R नीति (आकार 137 KB) तैयार की गई है।
टीएचडीसी ने परियोजना की योजना एवं डिजाइन इस प्रकार तैयार की है कि निजी भूमि का अधिग्रहण न्यूनतम हो। मौजूदा संपर्क मार्गों का अधिकतम उपयोग किया गया है तथा हतसारी बस्ती को प्रभावित होने से बचाने के लिए स्विचयार्ड का स्थान बदला गया।
परियोजना क्षेत्र का सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) अप्रैल 2008 में पूरा किया गया। इसमें हितधारकों से परामर्श, सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक जानकारी तथा भूमि अधिग्रहण से संबंधित आधारभूत आँकड़े शामिल किए गए।
हितधारकों से परामर्श के आधार पर पुनर्वास कार्य योजना (RAP) (आकार 1.05 MB) तैयार की गई।
R&R के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु :
- परियोजना स्थल एवं टीएचडीसी मुख्यालय में सामाजिक विकास से संबंधित समर्पित कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है।
- परियोजना प्रभावित समुदायों के साथ समन्वय हेतु प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की गई है।
- RAP के क्रियान्वयन हेतु श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम (SBMA) की सेवाएँ ली गई हैं।
- टीएचडीसी ने CSR नीति भी बनाई है।
- परियोजना क्षेत्र में सड़क संपर्क में सुधार।
- पेयजल योजनाओं का निर्माण।
- चिकित्सा सुविधाएँ एवं चिकित्सा शिविर।
- प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल बैग, वर्दी एवं स्टेशनरी का वितरण।
- स्थानीय क्षेत्र के विकास हेतु 9 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
- परामर्श एवं सहभागिता तंत्र तथा शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया गया है।
VPHEP के संभावित प्रभाव संबंधी मुद्दे
- उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर सामाजिक प्रभाव आकलन निम्नानुसार है।
- 18 प्रभावित गाँवों में से 7 गाँवों की निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया है।
- परियोजना हेतु कुल 141.569 हेक्टेयर भूमि आवश्यक है।
- 664.349 हेक्टेयर निजी भूमि में से केवल 31.639 हेक्टेयर (4.76%) का अधिग्रहण किया गया है।
- 3273.58 हेक्टेयर सरकारी/वन भूमि में से केवल 100.39 हेक्टेयर (3% से कम) परियोजना हेतु हस्तांतरित की गई है।
- हाट गाँव के प्रभावित परिवारों के अनुरोध पर पूरे गाँव की भूमि का अधिग्रहण किया गया तथा विशेष पैकेज प्रदान किया गया।
- निजी भूमि अधिग्रहण के कारण बड़े पैमाने पर अनिवार्य विस्थापन नहीं हुआ।
- टीएचडीसी का उद्देश्य सभी परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के जीवन स्तर को पुनः स्थापित करना अथवा उसमें सुधार करना है।