भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन की यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। आर्थिक विकास, शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार से प्रेरित ऊर्जा की तेजी से बढ़ती मांग के बीच, भारतीय विद्युत क्षेत्र को ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ सुनिश्चित करना आवश्‍यक हो जाता है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, जीवाश्म ईंधन के आयात पर निरंतर निर्भरता और दीर्घकालिक ऊर्जा लचीलेपन की आवश्यकता ने भारत के विद्युत क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है।
इस संदर्भ में, 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता प्राप्त करने और 2070 तक 'नेट जीरो' (शुद्ध शून्य) उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीओपी-26 में घोषित भारत की प्रतिबद्धताएँ, अक्षय ऊर्जा के परिनियोजन में तेजी लाने और उभरते एवं वैकल्पिक ऊर्जा संसाधनों की खोज करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।


नवीकरणीय ऊर्जा की आवश्यकता और नए ऊर्जा क्षेत्रों की खोज
सौर, पवन, जलविद्युत और पंप्ड स्टोरेज जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोत न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करते हैं, बल्कि ग्रिड स्थिरता, ऊर्जा स्वतंत्रता और सिस्टम की विश्वसनीयता में भी वृद्धि करते हैं। पारंपरिक अक्षय स्रोतों के अतिरिक्त, उभरते ऊर्जा क्षेत्र जिनमें पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस), भू-तापीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और लघु जलविद्युत परियोजनाएं आदि शामिल हैं, सामरिक महत्व प्राप्त कर रहे हैं।
इन प्रौद्योगिकियों में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी अनियमितता की चुनौतियों का समाधान करने, अप्रयुक्त ऊर्जा संसाधन हॉटस्पॉट की पहचान और उपयोग को सक्षम बनाने और चौबीसों घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की क्षमता है। आर्थिक विकास और प्रगति की सततता के साथ भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन समाधानों को समाहित करने वाला एक विविध और एकीकृत ऊर्जा मिश्रण आवश्यक होगा।


नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड का वर्तमान योगदान
विद्युत क्षेत्र में एक अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के रूप में, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसीआईएल) भारत की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी महत्वाकांक्षाओं में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। जलविद्युत विकास में अपनी सुदृढ़ आधारशिला के साथ, टीएचडीसीआईएल ने राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो में लगातार विविधता लाई है।
टीएचडीसीआईएल ने टिहरी में भारत की पहली 4×250 मेगावाट 'वेरिएबल स्पीड पंप्ड स्टोरेज परियोजना' (पीएसपी) को कमीशन किया, जो देश के विद्युत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह परियोजना ग्रिड लचीलेपन और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है। इसके अलावा, टीएचडीसीआईएल भारत में विभिन्न स्थानों पर कई पंप भंडारण परियोजनाओं के विकास में सक्रिय रूप से प्रयत्‍नशील है।
टीएचडीसीआईएल ने उत्तर प्रदेश के खुर्जा में 1,320 मेगावाट खुर्जा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट के कच्चे जल भंडार पर 16 मेगावाट/11 मेगावाट एसी का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट भी सफलतापूर्वक कमीशन किया है। यह पहल भूमि के उपयोग को अनुकूलित करती है और जल वाष्पीकरण को लगभग 60-70% तक कम करती है, जो नवीन और सतत परियोजना डिजाइन को प्रदर्शित करती है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप, टीएचडीसीआईएल ने ऋषिकेश स्थित अपने कार्यालय परिसर में 300 किलोवाट के वाटर इलेक्ट्रोलाइज़र और 70 किलोवाट के फ्यूल सेल वाले एक हरित हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया है, जो अगली पीढ़ी की स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
टीएचडीसीआईएल ने उत्तराखंड में चार धाम यात्रा मार्ग पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन विकसित किए हैं, जो हरित गतिशीलता और सतत पर्यटन पहलों का समर्थन करते हैं।
इसके अलावा, "पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना" के तहत, टीएचडीसीआईएल ने अपने विभिन्न कार्यालय भवनों में 595 किलोवाट की रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित की है, जो विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और कार्बन फुटप्रिंट में कमी लाने में योगदान देती है।
टीएचडीसीआईएल राष्ट्रीय ग्रिड को स्वच्छ और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति करने के उद्देश्य से बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, भूतापीय ऊर्जा, उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और अन्य अत्याधुनिक समाधानों जैसे अतिरिक्त नवीकरणीय और उभरते ऊर्जा क्षेत्रों का पता लगाने के लिए उत्सुक है। ये पहलें सतत विकास के लिए गैर-जल नवीकरणीय क्षमता के विस्तार और अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर संगठन के रणनीतिक फोकस को दर्शाती हैं।


टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के लिए भविष्य के अवसर
देश में अनुमानित लघु जलविद्युत (एसएचपी) क्षमता लगभग 21,134 मेगावाट है, जो 7,000 से अधिक चिन्हित स्थलों पर फैली हुई है; हालांकि, 2024 की शुरुआत तक, केवल लगभग 4,800 मेगावाट का ही दोहन किया गया है। देश की भौगोलिक स्थिति, विशेष रूप से हिमालयी राज्यों जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, और केरल और कर्नाटक में पश्चिमी घाट, साथ ही उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में नहर प्रणालियाँ और बांध,  एसएचपी विकास के लिए पर्याप्त संभावनाएं प्रदान करती है।  इसके बावजूद, नियामक, वित्तीय और लॉजिस्टिकल चुनौतियों के कारण इस क्षेत्र में सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में समानुपातिक वृद्धि नहीं देखी गई है।
संभावित और संस्थापित क्षमता के मध्‍य यह अंतर, स्केलेबल, समुदाय-आधारित और ग्रिड-कनेक्टेड एसएचपी प्रणालियों को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यह पेरिस समझौते के तहत भारत के 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान' (एनडीसी) के अंतर्गत अक्षय ऊर्जा विस्तार की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) नीतिगत समर्थन और प्रोत्साहनों के माध्यम से लघु जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देता है। एसएचपी परियोजनाओं का आमतौर पर बड़े बांधों की तुलना में पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़ता है, इनके निर्माण में कम समय लगता है और ये स्थानीय रोजगार सृजन तथा ग्रामीण विद्युतीकरण में योगदान देती हैं। उच्च प्रारंभिक लागत और स्थल-विशिष्ट बाधाओं जैसी चुनौतियों के बावजूद, लघु जलविद्युत भारत के नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण का एक महत्वपूर्ण घटक बनी हुई है।
एमएनआरई के दिशानिर्देशों और एसएचपी के लिए प्रोत्साहन समर्थन के अनुरूप, टीएचडीसीआईएल लघु जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के अवसरों विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में नहर प्रणालियों की खोज कर रही है।
टीएचडीसीआईएल राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के माध्यम से जलविद्युत परियोजनाओं के अधिग्रहण के अवसरों की भी खोज कर रही है। देश के अंतर्गत अवसरों के अलावा, टीएचडीसीआईएल जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है, विशेष रूप से किर्गिस्तान में, जिससे इसकी वैश्विक उपस्थिति और तकनीकी सहयोग का विस्तार हो सके।
व्यावसायिक विकास के दृष्टिकोण से टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड भारत की राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं और दीर्घकालिक ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों के साथ अपनी विकास रणनीति को संरेखित करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं, लघु जलविद्युत परियोजनाओं, पंप स्टोरेज और अन्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार करके, तथा हरित हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों की खोज के माध्यम से टीएचडीसीआईएल एक स्थायी, लचीले और भविष्य के लिए तैयार विद्युत क्षेत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती है।
नवाचार, रणनीतिक विविधीकरण और उत्तरदायी विकास के माध्यम से, टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की दिशा में भारत की यात्रा में सार्थक योगदान देना जारी रखे हुए है।