THDCIL ने 30.12.2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित 1200 MW कलाई-II जलविद्युत परियोजना के कार्यान्वयन के लिए अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं।

1200 MW कलाई-II जलविद्युत परियोजना में अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में, ब्रह्मपुत्र नदी की बाईं ओर की सहायक नदी, लोहित नदी पर 'रन-ऑफ-द-रिवर' योजना (नदी के प्रवाह पर आधारित) के साथ-साथ जल-भंडारण (pondage) की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य जलविद्युत उत्पादन के लिए उपलब्ध ऊंचे जल-स्तर (head) का उपयोग करके लोहित नदी के प्रवाह का सदुपयोग करना है।

कलाई-II जलाशय की सकल और उपयोगी भंडारण क्षमता क्रमशः 318.88 मिलियन घन मीटर और 29.76 मिलियन घन मीटर है, जिसमें पूर्ण जलाशय स्तर (FRL) 904.80 मीटर और न्यूनतम आहरण स्तर (MDDL) 900.00 मीटर निर्धारित है। लोहित नदी पर बनने वाला बांध एक कंक्रीट ग्रेविटी बांध होगा, जिसमें एक स्पिलवे और एक अलग डायवर्जन संरचना होगी। यह संरचना 5 नग 7.5 मीटर व्यास और 1 नग 8.5 मीटर व्यास वाली 'हेड रेस टनल' (सुरंगों) के माध्यम से 1128.06 क्यूमेक के नियंत्रित जल-प्रवाह को मोड़ने का कार्य करेगी।

पावरहाउस नदी के दाहिने किनारे पर भूमिगत रूप से बनाया जाएगा, जिसकी क्षमता (6 x 190 + 60) 1200 MW होगी। इस परियोजना के लिए कुल 869.3503 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, और परियोजना के लिए अधिग्रहित की जाने वाली संपूर्ण भूमि वन भूमि है।

परियोजना का EIA-EMP (पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और प्रबंधन योजना) वर्ष 2024-2025 के दौरान परामर्शदाता एजेंसी M/s WAPCOS India Ltd. के माध्यम से तैयार किया गया है। यह कार्य भारत सरकार के MoEF&CC (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) द्वारा निर्धारित 'संदर्भ की शर्तों' (ToR) के अनुरूप किया गया है। परियोजना के लिए जन-सुनवाई (Public Hearing) अगस्त 2025 में सफलतापूर्वक संपन्न हुई, और विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) द्वारा परियोजना के लिए 'पर्यावरणीय मंजूरी' (EC) की सिफारिश कर दी गई है। पर्यावरणीय मंजूरी (EC) शीघ्र ही प्राप्त होने की आशा है।