टीएचडीसी कोटेश्वर में काव्य संध्या

  

टीएचडसी इंडिया लिमिटेड कोटेश्‍वर परियोजना में श्री पी0के0 अग्रवाल महाप्रबंधक (परियोजना) ने प्रशासनिक भवन के प्रांगण में काव्‍य संध्‍या (कवि सम्‍मेलन) का शुभारम्‍भ श्री डी0 मणी, अपर महाप्रबंधक, श्री सजीव आर0, अपर महाप्रबंधक (प्रभारी ओ0एंडएम0) टिहरी परियोजना, श्री ए0के0 घिल्‍डियाल उप महाप्रबंधक (प्रभारी ओ0एंडएम0) कोटेश्‍वर, श्री बी0के0 सिन्‍हा,         उप महाप्रबंधक (कार्मिक एवं प्रशासन) कोटेश्‍वर, श्रीमती पूनम अग्रवाल धर्मपत्‍नी श्री पी0के0 अग्रवाल महाप्रबंधक (परियोजना),    श्रीमती विनिता सिन्‍हा धर्मपत्‍नी श्री बी0के0 सिन्‍हा,  श्रीमती सुमति मणी धर्मपत्‍नी श्री डी0 मणी एवं आमंत्रित कवियों के साथ संयुक्‍त रूप से दीप प्रज्‍जवलित कर किया। काव्‍य संध्‍या का आयोजन राजभाषा हिंदी को बढावा देने के उददेश्‍य से किया गया।

काव्‍य संध्‍या में साहित्‍य एवं कला में प्रख्‍यात कवियों में श्री अरूण जेमिनी, हरियाणवी हास्‍य कलाकार, श्री दीपक गुप्‍ता, हरियाणवी हास्‍य कलाकार, श्रीमती बलजीत कौर, ‘’तन्‍हा ‘’ दिल्‍ली, श्री अर्जुन सिसोदिया, बुलन्‍दशहर उ0प्र0, श्री विनोद पाल, दिल्‍ली ने अपनी प्रस्‍तुतियां पेश की।

सम्‍मेलन में कवियों ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करते हुए समाज में व्‍याप्‍त बुराईयों पर तंज कसे एवं वर्तमान में नेताओं एवं राजनीतिज्ञों की तिकडी के मोहजाल से बचने की हिमाकत करते हुए समाज को नई दिशा देने का भरपूर प्रयास किया। श्री अरूण जैमिनी, जो कि काका हाथरसी सम्‍मान, हरियाणा गौरव सम्‍मान प्राप्‍त हैं। (हास्‍य रस) ने इन पंक्‍तियों से शुरूआत की, सभी सदी में ढूंढते रह जाओगे, आंखों में पानी दादी की कहानी, प्‍यार के दो पल नल नल में जल, परोपकारी बंदे, और अर्थी को कंधा ढूंढते रह जाओगे।

डा0 अर्जुन सिसौदिया (वीर रस) बुलंदशहर जिन्‍हे विभिन्‍न सम्‍मान जैसे काव्‍य गौरव, काव्‍य भूषण, काव्‍य शिरोमणी और श्‍यामनारायण पाण्‍डे पुरस्‍कार प्राप्‍त हैं, द्वारा- दिलों में देश का जज्‍बा अजब तूफान रखते हैं, वतन पे सौदा होने का सभी अरमान रखते हैं। हम अशफाक बिस्‍मिल और उधम सिंह के बेटे हो मजहब कोई भी सीने में हिंदुस्‍तान रखते हैं।

बलजीत कौर ‘’तन्‍हा ‘’ जो कि सन 2016 में राष्‍ट्रपति जी के कर कमलों द्वारा उत्‍कृष्‍ठ शिक्षिका सम्‍मान एवं गोहाना में नेशनल सुपर वुमेन अवार्ड से सम्‍मानित हुई है एवं काव्‍य के क्षेत्र पुरस्‍कार प्राप्‍त है, वाह वाह क्‍या बात है में प्रस्‍तुति तथा इनके द्वारा किसी को चाह लो तो चाहत हो जाती है, अपना बना लो तो आदत हो जाती है। मैंने जान लिया दिल में रहता है खुदा लोगों को हंसा लो इबादत हो जाती है।

श्री विनोद पाल दिल्‍ली द्वारा- आपके लिए चन्‍द कतरे लहू के लाया हूँ खुद मुरझा गया हूँ पर फूल खुशबू के लाया हूँ। आप लोगों को ताली बजानी ही होगी मैं घर से पत्‍नी के पांव छू के आया हूँ।

श्री दीपक गुप्‍ता हरियाणवी द्वारा- कैसी आजादी है यंहा सवेरों से डर लगता है जब से लुटे उजालों में अंधेरों से डर लगता है। पाखण्‍डी बाबाओं की करतूतों का ये आलम है। अब तो कोठों से भी ज्‍यादा डेरों से डर लगता है।

कार्यक्रम में वरिष्‍ठ अधिकारियों में श्री बीर सिंह, उप महाप्रबंधक, श्री बीरेन्‍द्र सिंह मियां, उप महाप्रबंधक, डा0 प्रमोद कुमार मुख्‍य चिकित्‍साधिकारी टीएचडीसी एवं आयोजक सदस्‍यों में श्री आर0एस0 नेगी, वरि प्रबंधक, श्री सुनील बडोनी प्रबंधक, श्री धर्मप्रकाश त्‍यागी उप प्रबंधक, श्री हिमांशु असवाल, उप प्रबंधक, श्री एस0एस0 राणा, उप प्रबंधक, श्री आर0डी0 ममगांई वरि0 जनसम्‍पर्क अधिकारी, श्री के0एस0 मेहता वरि0 हिंदी अधिकारी, श्री पदम चमोली विधि अधिकारी उपस्‍थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री गिरीश उनियाल वरि0 विधि अधिकारी द्वारा किया गया।

Updated on : 27/04/2018